U.P.N.O.A. demands placed by
1. A campaign should be launched to identify the sports talent of rural areas and promote them: –
So that the traditional and rural environment can be saved in Indian sports which have reached the verge of extinction. And by identifying children from rural areas, especially tribal tribes, etc., by selecting them in sports like gymnast and other Indian environment, they can be added to the mainstream of India, as well as in the Olympics, the same people can be included in sports like gymnastics, wrestling, archery, swimming and athletics. I can give medal to India.
2. Training Camps and Playing Kits for Non-Olympic Games:-
There are many such sports in non-olympic games, which have national and international competitions, whose players are also bringing medals for the state and country, such as chess, carrom, golf, etc. Patya, Shooting Ball, Power Lifting, Kite Flying Rugby, Lifting, Wrestling, Body Building and Kite Flying etc. This game is also very popular and there are many famous players in rural areas. The sports department should provide training camps to the players of these sports and financial assistance to sports teams and their sports federations like other Olympic games.
3. Players who bring medals at International / National level in non-Olympic sports should be honored with the highest sports honor of the state.
4. To stop the migration of sports talent from the state, review and strictly implement the 2 percent player recruitment quota:-
Recruitment by the state government The mandate of 2% player quota has already been done, but till date, whether 2 percent players have been recruited from quota or not, it has not been reviewed. In order to stop the migration of players in the state, to provide them employment opportunities and to maintain their honor, in which department the recruitment of 2 percent sportsperson quota has not been done, it should be reviewed so that the sports talent of the state gets more medals for the state. And can ensure his future in sports to bring laurels to the state. For this, the UP Non-Olympic Association has decided to launch a campaign so that the 2 percent player recruitment quota can be strictly implemented in the interest of the players from the Uttar Pradesh government.
5. Tribal and rural areas of many areas of the state are neglected till date, in those areas (tribal and rural areas) there is a need to open sports colleges and sports hostels for some such sports such as archery, athletics, swimming, gymnast, wrestling etc. So that sports talents can be identified from such places and they can bring medals for the country.
1. ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को चिन्हित करके उन्हें आगे बढ़ाना का अभियान चलाया जाना चाहिएः-
पराम्परागत व ग्रामीण परिवेश में खेले जाने वाले भारतीय खेल जो लुप्त होने के कगार पर पहुँच चुके है, को बचाया जाना आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कर आदिवासी जनजाति आदि के बच्चों को चिन्हित करके नट से जिमनास्ट तथा अन्य भारतीय परिवेश के खेलों में चयनित करके भारत की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। साथ ही ओलम्पिक मे यही लोग जिमनास्टिक, कुश्ती, तीरन्दाजी, तैराकी तथा ऐथलेटिक्स जैसे खेलों मे भारत को पदक दिला सकते हैं। देश व प्रदेश के कई आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्र आजतक उपेक्षित है।
2. नॉन ओलम्पिक खेलों के लिए प्रशिक्षण शिविर व प्लेइंग किटः-
नॉन ओलम्पिक खेलों मे ऐसे बहुत से खेल हैं जिनकी राष्ट्रीय व अर्न्तराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होती है जिनके खिलाड़ी प्रदेश व देश के लिए मेडल भी ला रहे है जैसे- शतरंज, कैरम, गोल्फ, आत्या-पात्या, शूटिंग बाल, कुंग-फू, पावर-लिफ्टिंग, कुश्ती, बॉड़ीबिल्डिंग तथा पतंगबाजी आदि। यह खेल काफी लोकप्रिय भी है ओर ग्रामीण क्षेत्रों मे काफी इनके नामचीन खिलाड़ी मौजूद हैं। खेल विभाग द्वारा इन खेलों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण शिविर तथा खेल किट व इनके खेल संघो को अन्य ओलम्पिक खेलों की भांति आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।
3. नॉन ओलम्पिक खेलों में भी अर्न्तराष्ट्रीय / राष्ट्रीय स्तर पर पदक लानें वालें खिलाड़ियों को प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए। जिस प्रकार भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार पाने हेतु विशेषज्ञों तथा अन्य पदाधिकारियों की एक कमेटी बनायी गयी है ऐसी कमेटी राज्य स्तर पर भी सर्वोच्च खेल सम्मानों के लिए बनायी जाये। अर्जुन पुरस्कार मे सम्मिलित सभी खेलों को लक्ष्मण पुरस्कार व रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मे शामिल किया जाये और नॉन ओलम्पिक खेलों के खिलाड़ियों को भी इसमें स्थान दिया जाय़े।
4. प्रदेश से खेल प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए 2 प्रतिशत खिलाड़ी भर्ती कोटा की समीक्षा तथा कडाई से लागू करनाः-
– प्रदेश सरकार द्वारा भर्ती में 2 प्रतिशत खिलाड़ी कोटा का शासनादेश तो हो ही चुका है लेकिन आज तक 2 प्रतिशत खिलाड़ी कोटे से भर्ती की गई है या नही इसकी समीक्षा नही हुई है। प्रदेश में खिलाड़ियो का पलायन रोकने, उन्हे रोजगार का अवसर प्रदान करने तथा उनके सम्मान को बनायें ऱखने के उद्देश्य से 2 प्रतिशत खिलाड़ी कोटे की भर्ती किस विभाग मे नही की गयी है इसकी समीक्षा की जानी चाहिए ताकि प्रदेश की खेल प्रतिभाएं प्रदेश के लिए और पदक ला सके और प्रदेश का नाम रोशन करने हेतु खेल में अपना भविष्य सुनिश्चित कर सके। इसके लिए उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन ने एक मुहिम छेड़ने का निर्णय लिया है ताकि उ0प्र0 सरकार से खिलाड़ियों के हित मे 2 प्रतिशत खिलाड़ी भर्ती कोटा कड़ाई से लागू हो सके। खिलाड़ियों को राज्य में नौकरी मिले। निजी क्षेत्र में खिलाड़ियों को नौकरी में आरक्षण भी मिले।
5. प्रदेश के कई इलाको के आदिवासी व ग्रामीण आज तक उपेक्षित हैं। इन इलाकों (आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों) में कुछ ऐसे खेल जैसे- तीरंदाजी, ऐथलेटिक्स, तैराकी, जिमनास्ट, पहलवानी आदि के लिए स्पोर्टस कॉलेज व खेल छात्रावास खोले जाने की आज आवश्यकता है ताकि ऐसे जगहो से खेल प्रतिभाएं चिन्हित की जा सके और वो देश के लिए मेडल ला सके।
6. राज्य स्तर पर खेलों के विशेष अल्ट्रा ट्रेनिंग सेंटर खोले जाये।
7. छोटे जिलों, कस्बों तथा बड़े ग्रामों में स्टेड़ियम हों और उसमें सहायक खेल प्रशिक्षक की तैनाती की जाये। ग्रामों में यदि प्रशिक्षक तैनात न हो सकें तो ब्लॉक स्तर पर तैनात बी.ओ.(प्रादेशिक दल) को इंचार्ज बनाया जाये तथा इन स्टेड़ियमों में स्थानीय स्तर के अर्न्तराष्ट्रीय खिलाड़ियों की भी तैनाती की जा सकती है।
8. लक्ष्मण पुरस्कार, रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार विजेता एवं अर्न्तराष्ट्रीय खिलाड़ियों को बसों, ट्रेनों व हवाई जहाज में निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिले।
9. अर्जुन पुरस्कार, लक्ष्मण पुरस्कार, रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार विजेता एवं अर्न्तराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा व चिकित्सा सुविधा मिले।
10. राज्य में स्पष्ट खेल नीति होनी चाहिए। वर्तमान मे कोई राजनैतिक दल खेल नीति व खेलों के विकास की अपने संकल्प पत्र / घोषणा पत्र में स्थान नही देते हैं- ये बड़ी विड़म्बना है। राजनैतिक पार्टियों को अपने घोषणा पत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा की तरह खेल भी रखना चाहिए। खिलाड़ियों के मुद्दे पर कोई बात नही करता।
11. ओलम्पिक खेलों में अपने देश के पारम्परिक खेलों को अपेक्षित स्थान मिलना चाहिए।
12. लोक-कला, संस्कृति की तरह उत्तर प्रदेश मे पारंपरिक, एवं लोक-कलाओं पर आधारित खेलों पर शोध, उन्हे चिन्हित करने और उनके विकास की योजनाओं को तैयार करने के लिए एक शोध संस्थान खोला जाए। इन खेलों के लिए एक अलग स्पोटर्स कॉलेज तथा नॉन ओलम्पिक खेलों की एक पृथक खेल अकादमी की स्थापना की जाये।
13. खेल विभाग में नॉन ओलम्पिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए जिला / मण्डल / राज्य स्तर पर सहायक क्रीड़ा अधिकारी के पद को अलग से सृजित किया जाय एवं खेल विभाग में इसके लिए सहायक खेल निदेशक का पद सृजित किया जाये।
14. जिला खेल-कूद प्रोत्साहन समितियों में नॉन ओलम्पिक खेलों से जुड़े संघो की भागीदारी अनिवार्य रुप से सुनिश्चित करायी जाय।
15. उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन, केला रायपुर, लुधियाना (पंजाब) के पैटर्न पर प्रतिवर्ष ग्रामीण खेलों का आयोजन खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग तथा पर्यटन विभाग के सहयोग से कराना चाहती है।
16. उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन-पराम्परागत, क्षेत्रीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोक प्रिय नॉन ओलम्पिक खेलों को प्रत्येक 4 वर्ष मे एक बार स्टेट गेम्स तथा मण्डल स्तर पर दो वर्ष में एक बार व जिला स्तर पर प्रत्येक वर्ष अलग से आयोजित करना चाहती है, ताकि भारतीय परम्परा के खेल लुप्त न हो तथा यहाँ के लोगो में फिर से ऐसे खेलों के प्रति रुचि व जागृति पैदा की जा सके ताकि यह खेल सरकार के सहयोग से ओलम्पिक व राष्ट्रकुल के खेलों में शामिल होने के योग्य बन सके। इसके लिए खेल नीति में ओलम्पिक खेलों की भाँति अनुदान / आर्थिक सहायता की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
17. नॉन ओलम्पिक खेलों के आयोजको व खिलाड़ियों को किराये की माफी टी0ए0, डी0ए0 तथा विशेष अवकाश जैसी सुविधाओं का प्रवधान होना चाहिए।
18. खेल विभाग के सभी खेल प्रशिक्षकों का एक काडर निर्धारित होना चाहिए तदानुरुप जिलों में उनकी तैनाती की जाए।
19. प्रदेश के सभी ब्लॉकों में एक मॉडल स्टेडियम होना चाहिए। सब से बड़ी समस्या इस बात की है कि शासकीय धन से स्टेडियम तो बन जाता है लेकिन उसका मेन्टिनेंस (रखरखाव) नहीं हो पाता है और स्टेडियम 2-4 वर्ष में खराब स्थिति में हो जाते हैं। शासन को कोई ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि उनका संचालन Self Sustainable Model से होता रहे साथ ही खेल सम्पत्तियों के रखरखाव हेतु कॉडर फार मैनेजर भी बनना चाहिए। खेल विभाग के जिले स्तर के संसाधन अभी अधूरे हैं इसकी त्रैमासिक नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
20. ओलम्पिक, राष्ट्रमंडल तथा सभी मेडल प्राप्त नेशनल खिलाड़ियों को लोकतंत्र सेनानी की तरह गुजर बसर करने हेतु पेंशन भी मिलनी चाहिए।
21. सभी खेलों में खिलाडियों के चोटिल होने की काफी संभावना रहती है उनको विशिष्ट आर्थिक सहायता प्रदान करायी जाए तथा खेल के दौरान लगने वाली चोटों के विरुद्ध बीमा की योजना भी लागू की जाए।
22. खेल को बढ़ावा देने, अर्न्तराष्ट्रीय-राष्ट्रीय-राज्य टूर्नामेन्ट के अच्छे आयोजन कर्ताओं तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को ऊपर लाने में लगे विभिन्न खेल संघो के प्रमुख पदाधिकरियों को ”Award For Those Who Promote Sports ” सम्मानित करने के लिए प्रतिवर्ष एक राष्ट्र/राज्य स्तरीय सम्मान दिये जाने का प्रविधान करना चाहिए।
सामूहिक समस्यायेः-
1. खिलाड़ियों को उ0प्र0 से पलायन रोकने के लिए खेल नीति में स्पष्ट व्यवस्थायें होनी चाहिए, इसके लिए अच्छे और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश में सरकारी, अर्द्दसरकारी व निजी क्षेत्र में उनके प्रदर्शन के मुताबिक अच्छी नौकरियां, तथा नौकरी शुदा खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के आधार पर “आउट ऑफ टर्न प्रमोशन” दिलाया जाये।
2. राज्य के अर्न्तराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले सीनियर, जूनियर व सबजूनियर वर्ग के खिलाड़ियों, विभिन्न खेल के राज्य संघो के पदाधिकारियों को राज्य सड़क परिवहन निगम के बसों मे मुफ्त यात्रा की सुविधा तथा राजकीय चिकित्सालयों में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय। इसके लिए सम्बन्धित विभाग को लिखा जाए।
3. जूनियर व सब जूनियर वर्ग के राज्यस्तरीय खिलाड़ियो के स्कूल का शिक्षण शुल्क माफ किया जाए। स्कूलों में बिना किसी लागत या अत्यन्त कम लागत के खेले जाने वाले खेल जैसे कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, बालीबॉल, फुटबॉल, बॉडीबिल्डिंग, योग, शतरंज तथा ऐथेलिटिक्स को बढ़ावा देने के लिए समुचित कदम उठाये जाए। स्कूलो में लिए जाने वाले खेल शुल्क में एकरुपता लायी जाए। साथ ही खेल को शिक्षा में अनिवार्य विषय के रुप में शामिल किया जाए। जिला स्तरीय / अन्तरविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं को अनिवार्य रुप से प्रति वर्ष आयोजित कराया जाए।
4. अन्य राज्यों की तरह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने जाने वाली राज्य की टीमों को यात्रा के दौरान मार्ग व्यय दिया जाय जिसका प्रस्ताव हमारी एसोसिएशन द्वारा शासन में प्रेषित किया जा चुका है, साथ ही अर्न्तराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं मे हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियो को दी जानी वाली सहायता / आर्थिक राशि पहले ही प्रदान की जाए।
5. खेल संघो को प्रतियोगिता के पूर्व निर्धारित मानक के अनुसार अनुदान दिया जाए ताकि आयोजन में किसी प्रकार कोई कठिनाई न हो, जो खेल संघ अनुदान का उपयोगिता प्रमाण पत्र न प्रस्तुत करें उन्हे काली सूची में डाला जाए। विशेषकर नॉन ओलम्पिक खेलो की प्रतियोगिताओं के लिए अनुदान की राशि की अलग व्यवस्था की जाये।
6. उद्योग बन्धु, फिल्म बन्धु, शिक्षामित्र, पंचायत मित्र की तरह ब्लॉक, जिला, मंडल व राज्य स्तर पर ‘खेल मित्र’ का गठन किया जाए। इसमें खेल अधिकारी, खेल संघो के पदाधिकारी, व्यापारी व उद्योग जगत से सम्बन्धित लोगों को शामिल किया जाए।
7. खेल नीति के अध्याय 6 में अंकित उद्देश्य- “निजी क्षेत्र से सहयोग” प्राप्त कर सभी खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता व स्पांसरशिप उपलब्ध करायी जाए।
8. राज्य के सभी ओलम्पिक व नॉन ओलम्पिक खेलों के कार्यालय एक छत के नीचे एक जगह स्थापित किये जाए।
9. सभी ओलम्पिक व नॉन ओलम्पिक खेल के पदाधिकारियों (अध्यक्ष / महासचिव) को उ0प्र0 सचिवालय का 5 वर्षीय पास जारी किया जाए ताकि संघ के पदाधिकारी अपनी समस्याओं के सम्बन्ध में माननीय मंत्री महोदय तथा प्रमुख सचिव महोदय आदि से मिल सकें।
10. ‘स्कूल / विद्यालय ’ खिलाड़ियों की नर्सरी है। प्रदेश में लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जहाँ गेम्स टीचर व खेल के मैदान नहीं है। लेकिन फिर भी वहाँ ‘क्रीड़ा-शुल्क’ लिया जाता है। इन स्कूलों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है। शासन द्वारा प्रभावी शासनादेश निर्गत किया जाना चाहिए जिससे स्कूल की मान्यता दिलाने / चलती रहने में जिला क्रीड़ा अधिकारी के एन0ओ0सी0 / अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो।
11. ‘खेल विकास फण्ड’ का गठन किया जाना चाहिए, इस मद में आर्थिक सहयोग के रुप में उदाहरण स्वरुप पंजीयन विभागों (असलहा लाइसेन्स, राजस्व, मोटर विहिकल्स, रजिस्ट्रार फर्म सोसायटी आदि) के समन्वय से क्रीड़ा अधिभार शुल्क (लेवी) के रुप में यदि 5/- प्रति पंजीयन पाप्त कराने के शासन के निर्देश मिल जायें तो इस फण्ड में काफी धनराशि एकत्र हो सकती है।
12. खेल संघों व खेल निदेशालय की संयुक्त समन्वय समिति गठित की जानी चाहिए। इस समिति में ऐसे परिवार व ऐसे पाकेट्स को भी चिन्हित करके शामिल किया जाना चाहिए जिनका कई पीढियों से खेलों में योगदान रहा है। इस समिति की त्रैमास में एक बार बैठक भी होनी चाहिए।
13. शासन व खेल निदेशालय द्वारा बिना भेदभाव के सभी खेल संघो की मदद करनी चाहिए और निर्धारित मानक के अनुसार उन्हे अनुदान / सहायता दी जानी चाहिए। विगत वर्षों में ऐसा देखने में आया है कि चन्द खेलों / खेल संघो को 5 लाख आर्थिक सहायता प्रदान की जाती रही है। प्रत्येक खेल संघो को उनके वार्षिक कार्यकलापों हेतु आर्थिक सहायता निर्धारित मानक के अनुसार नियमित दी जानी चाहिए। राज्य के खेल संघो की भारत सरकार / सम्बन्धित खेल राष्ट्रीय फेडरेशन से मान्यता होने सम्बन्धित प्रश्न को नजर अंदाज किया जाना चाहिए।
14. बड़े-बड़े उद्योग घरानो द्वारा किसी एक खेल को गोद लेने हेतु प्रेरित किया जाना चाहिए। ऐसे सहयोगी उद्योग घरानों को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं जैसे- आयकर व व्यापार कर छूट की रियायत दिलायी जाए।
15. यू0पी0एन0ओ0 को नॉन ओलम्पिक खेलों के लिए बहुउद्देशीय एकेडमी स्थापित करने के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि राजधानी लखनऊ में निःशुल्क आवंटित की जानी चाहिए।
16. नॉन ओलम्पिक खेलों की राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रदेश व जिले के खिलाड़ियों या उनकी टीमों को ओलम्पिक खेलों की तरह निःशुल्क अथवा रियायती दर पर रेलवे कन्सेशन की सुविधा दी जानी चाहिए।
-:उद्देश्य:-
1. नॉन ओलम्पिक खेलों को अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाना।
2 – ऐसे खेलों को लोकप्रिय बनाना।
3 – पक्षपात की भावना खत्म करना।
4 – खेल के माध्यम से शान्तिप्रिय एवं वसुधैव कुटुम्बकम आधारित विश्व का निर्माण करना।
5 – धन के लिए खेल रहे प्रोफेशनल खिलाड़ियों की मानसिकता बदलना।
6 – हर एक भारतीय खेलों को उन्ही के परिवेश व स्वतंत्र रुप से उनकी आवश्यकता के अनुरुप खेलने देना।
7- नॉन ओलम्पिक खेलों को एक प्लेटफार्म प्रदान करना।
8 – सभी नॉन ओलम्पिक खेलों का विकास करना।
9 – खेलों से लिंग-भेद, हिंसा, राजनीति खत्म करना।
10 – ऐसे खेलों का सामाजिक स्तर परिवर्तित करना।
11 – निष्पक्ष खेल भावना, मित्र भावना, आपसी व पारस्परिक संबंधों की मजबूती के लिए एकता के साथ खेल कराना।
12- विभिन्न खेल महासंघो तथा सार्वजनिक संगठनो को अच्छे स्तर के खिलाड़ियो के भविष्य निर्माण के लिए सहायक बनने हेतु प्रेरित करना।
13.गांव व शहरो की दूरी कम करने के साथ ग्रामीण प्रतिभाओं की खोज करना।



Translate
